हाँ, मे प्यार मे हूँ ।

आज कल दिल कुछ ऐसे ज़ोरो से धड़कने लगा हे…
ऐसा लगता हे के, हाँ,में प्यार में हूँ ।

आज कल सुबह की पहली किरण मेरे चेहरे को छूने लगी है,
फूल भी खुश्बुओ की तरह महकते दिखने लगे है,
खाने का स्वाद भी कुछ चटपटासा लगने लगा है,
किसी का एहसास अपने पास होने लगा है,
बेकार बैठू तो भी अपने में खोया हुआ जैसा लगता है,
अकेले अकेले मुस्कुराने की आदत पड़ने लगी है…,
खुद क साथ सबको खुशियां बाँटने का दिल करता है,
शाम को सूरज का अलविदा कहना अब अच्छा लगने लगा है ।

आज कल चुपके से सुनने लगा हूँ पंछिओं को बातें करते हुए,
समज़ ने लगा हूँ अब, उनकी ये अंजानीसी आवाज़ को में,
जैसे मेरी ही कहानियाँ बयाँ करते है, उसका एहसास होने लगा है,
उड़ जाते हुए ये परिंदो को, सपनो में कैद करने का मन करता है ।

हाँ, कहीं नदी के किनारे बैठ केर वक़्त कटने लगा है,
किनारे पर घूमती हुई मेरी उंगलियां दिल का हाल बतलाने लगी है,
आँखे मेरी खुदको मूँद करके मुझे देखने की कोशिश में लगी है,
और बहते पानी की वो सुरीली आवाज़ महसूस करने लगी है ।

हाँ, आज कल दिल भीड़ में भी अकेले रहने लगा है,
जैसे खुद को ज़िन्दगी की दौड़ में साबित करने चला है,
कभी किताबों में, तो कहीं बहार की दुनिया में,
छोटी छोटी बातों की खुशियां ढूंढने लगा है,
दिल की ख़ुशी चेहरे से बयान करने लगा है ।

हाँ..,
आज कल दिल कुछ ऐसे ज़ोरो से धड़कने लगा है..
ऐसा लगता है के में प्यार में हूँ ।
शायद खुद के… या फिर शायद किसी अपने के…

 

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